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मध्य प्रदेश ग्रामीण आजीविका परियोजना (म.प्र.ग्रा.आ.प.)
इस परियोजना का आरंभ जून २००४ में म.प्र. के चार आदिवासी बाहुल्य जिलों-मंडला, डिंडॉरी, शहडोल एवं अनूपपुर में किया गया । इसका उद्देश चयनित ग्रामों में प्राकृतिक संसाधनों के पुर्नोत्पादन एवं स्थानिय समुदायों के क्षमता विकास को केंद्रित कर आत्मनिर्भर बना कर आजिविका के माध्यम का निर्माण करना था। अंतर्राष्ट्रीय विकास विभाग (डी.एफ.आई.डी.) द्वारा इस परियोजना को वित्तीय सहायता प्रदान किया गया। जिसे दो चरणों में विभाजित किया गया है।
इस परियोजना के अंतर्गत राज्य के उपरोक्त ४ जिलों में ५१ एकीकृत पशुधन विकास केन्दों का संचालन किया गया। परियोजना से लाभांवित किसानों के जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन देखा गया।
परियोजना का कार्यकाल १२ फरवरी २००९ को पूर्ण हुआ। परियोजना अवधि में सफलतापूर्वक प्राप्त उपलब्धियों का विवरण निम्नानुसार है
| जिला |
पशुधन िकास केन्द्रों की संख्या |
उन्नत संकर नस्ल के बछड़॓/बछियो ं की संख्या |
बन्ध्याकरण |
बांझपन चिकित्सा |
कृमिनाश |
प्राथमिक उपचार |
टीकाकरण |
| अनुपपुर |
१३ |
३८९ |
५३०८ |
१९८९ |
५८७८७ |
५७५० |
१२५०६८ |
| मण्डला |
१२ |
१८९ |
४७११ |
४२५८ |
४१३९५ |
५६७२ |
९२२४९ |
| डिंडोरी |
१४ |
१८७ |
४३७७ |
२०५२ |
२४७४१ |
६१६६ |
५९०१३ |
| शहडोल |
१२ |
२६० |
५००७ |
२६५६ |
७७०५२ |
८०२३ |
१३५६६४ |
| कुल |
५१ |
१०२५ |
१९४०३ |
१०९५५ |
२०१९७५ |
२५६११ |
४११९९४ |
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