चूहों में सफल गर्भावस्था उस स्थिति में नष्ट हो सकती है । यदि गर्भवती चुहिया के इर्द-गिर्द अपरिचित चूहा (जिसने मादा को गर्भवती नहीं किया) मंडराने लगे, इसे "बूस प्रभाव" कहते हैं ।
सीप अपना लिंग बदल कर विपरित लिंग धारण कर सकती है और पुन: उसी लिंग में आ सकती है ।
पक्षी के अण्डे की पक्षी के आकार से तुलना करने पर ज्ञात होता है कि शुतुर्मुग के अण्डे सबसे छोटे होते हैं और मर्मर पक्षी के अण्डे सबसे बड़े होते हैं ।
मिसा में पायी जाने वाली रीढ़धारी चुहिया दूसरी मादाओं के पसव के समय दाई की भूमिका निभाती है । वह नाभि-नाल को काटती रहती है तथा नवजात बच्चों की चाटकर सफाई करती रहती है । जबकि मादा अन्य बच्चों को जन्म देती रहती है ।
काले अल्याइन गिरगिट की सगर्भता अवधि सबसे लम्बी होती है और यह ऊंचाई पर निर्भर होती है । जब वे समुद तल से ४,६०० फीट की ऊंचाई पर होते हैं तो शिशु को मां के गर्भ में विकसित होने में तीन साल से भी अधिक समय लगता है ।
कुछ प्राणियों की प्रजातियों में निषेचन काफी विलम्ब से होता है। यह वह प्रकिया है, जिसमें नर मादा के अन्दर बीजारोपण कर देता है और शुक्राणु गर्भनलिका में एक अवधि तक जीवित बने रहते हैं । शुक्राणु गर्भनलिका की विशेष ग्रंथि में सुरक्षित रहते हैं। उदाहरण के लिये कुछ चमगादड़ शरद ऋतु में शीतनिद्रा के पूर्व संसर्ग करते हैं, किन्तु मादा में अण्डोत्सर्ग वसंत के पहले नहीं होता । उसकी नलिका में शुक्राणु तब तक सुरक्षित मौजूद रहते हैं, जब तक निषेचन नहीं हो जाता । मादा के गर्भाशय में निषेचन की इस प्रकिया में ६८-१९८ दिन का समय लगता है, जो कि चमगादड़ की प्रजाति के ऊपर निर्भर होता है । सांपों की कुछ प्रजातियों में यह अवधि ६ साल तक की लम्बी हो सकती है।
मादा हाथी का ऋतु-काल आश्चर्यजनक ढंग से लम्बा होता है। ( १६ सप्ताह ) और गर्भावस्था अवधि २२ माह की होती है ।